ज्ञान और विज्ञान


ज्ञान और विज्ञान में अंतर


विज्ञान का अर्थ है दुनिया में उपस्थित कई वस्तुओं की तमाम जानकारी हासिल करना। यदि ज्ञान को जाने तो ज्ञान का मतलब है भगवान में अस्था व आध्यात्मिक जानकारी चरित्र का निर्माण करना है  । कहते हैं कि इस लोक में 84 लाख योनियों है  जिसे प्रत्येक आत्मा को कर्म के हिसाब से भोगनी होती है, मनुष्यों आपने दिमाग के जरिये किसी वस्तु का अस्तित्व की जानकारी प्राप्त करना विज्ञान है। अब अगर ज्ञान और विज्ञान की आपस में तुलना करें तो वह कुछ ऐसी होगी। 
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हाइड्रोजन के दो कण जब ऑक्सीजन के संपर्क में आते हैं तो पानी बनता है-यह विज्ञान है, लेकिन इस पानी से जीव- आत्मा की प्यास बुझती व आवश्यकता पूरी होती है-यह ज्ञान है।


विज्ञान की दिशा ज्ञान है जहाँ विज्ञान खत्म होता है वह से ज्ञान की शुरुआत  होती है। विज्ञान एक खोज है। जिसकी पहल वैज्ञानिक करते रहते हैं। कहते हैं कि भौतिक उपलब्धियां विज्ञान का सच नहीं हैं, आत्म तत्व ही विज्ञान का सच है। विज्ञान ने अब तक प्रकृति के अनेक रहस्य खोज निकाले हैं, परन्तु आद्यात्मिक ज्ञान की खोज पूर्ण गुरु हि कर सकता है जो हमारे शास्त्रों के अनुसार हो।
वर्तमान में हो रहे हाहाकार में मनुष्य की विज्ञान फेल हो गई है। जहाँ से विज्ञान खत्म होती है वहाँ से ईश्वर की राह आध्यत्मिक ज्ञान की शुरुआत  होती है जहाँ विज्ञान मेडिकल काम नही करता वह आस्था  व ईश्वर की भगति काम आती है।




अंत में विज्ञान का जहाँ विराम होता है  जहाँ अंत निश्चित तौर पर ईश्वर पर जाकर ठहरता है , क्योंकि ईश्वर को न मानना फिलहाल विज्ञान का भ्रम है। परन्तु यह सत्य है ईश्वर से ही विज्ञान है ज्ञान है ये दुनिया है आकाश में तारे तभी तक टिमटिमाते हैं जब तक सूर्य का उदय नहीं होता।




ठीक इसी तरह विज्ञान अनुसंधानों में तभी तक भटकता रहेगा जब तक उसे पूर्ण आद्यात्मिक ज्ञान आत्मज्ञान नहीं हो जाता है। पूर्ण परमात्मा को पाने की राह उस पूर्ण गुरु से प्राप्त होती है जो हमे हमारे शास्त्रों के अनुसार बताते हैं ज्ञान के मुताबिक  आध्यात्मिक ज्ञान आत्मज्ञान ही मूलविज्ञान है, क्योंकि जब तक किसी कार्य या ज्ञान के माध्यम से हम ईश्वर तक न पहुंचें तब तक ज्ञान अधूरा रहता है। पूर्ण ज्ञान पूर्ण गुरु से प्राप्त होता है 



वैज्ञानिकों के मुताबिक ईश्वर को भौतिक विज्ञान के तौर-तरीकों से जाना और सिद्ध किया ही नहीं जा सकता है। ईश्वर की प्राप्ति आध्यत्मिक ज्ञान से पूर्ण परमात्मा की पहचान करके भगति करने से सिद्ध की जा सकती है 
उस परमात्मा की जानकारी उस पूर्ण गुरु से प्राप्त करना चाहिए जो हमें आध्यत्मिक ज्ञान से आत्मज्ञान से परिचित करवाये । विज्ञान का अस्तित्व जहाँ खत्म होता है वहाँ से ईश्वर का आध्यत्मिक ज्ञान शुरू  होता है


उस परमात्मा की जानकारी वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के पास है जो हमे हमारे पवित्र सद्ग्रन्थों के अनुसार भगति  आध्यत्मिक ज्ञान से परिचित करवाते हैं 
संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेकर अपना जीवन  सफल बनायें।
अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए साधना tv पर शाम 7  :30 बजे से 8 :30 बजे तक।



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