नास्तिकता

   चीन नास्तिक क्यों बना
इस सृष्टि का निर्माण पूर्ण परमात्मा ने किया है व
मनुष्य को बनाने वाला भगवान है। चीन में महात्मा बुद्ध ने भगवान प्राप्ति के लिए कई वर्षों तक हठयोग किया। जो कि हमारे पवित्र शास्त्रों के विरुद्ध है।
पवित्र श्री मद्भागवत गीता जी में अध्याय 17 श्लोक 5 में गीता जी के ज्ञान दाता ने हठयोग करने को मना किया है।
महात्मा बुद्ध ने शास्त्र विरुद्ध भक्ति करी व मन माना आचरण किया। जिससे उन्हें परमात्मा की प्राप्ति नही हुई।
पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति शास्त्रों के अनुसार सतभक्ति करने से होती है 
कबीर साहेब जी अपनी वाणी में बताते हैं👇🏻
वेद मेरा भेद है, मै ना वेदन के माही 
जोन वेद से मैं मिलूं, वह वेद जानते नहीं।
पूर्ण परमात्मा सतभक्ति करने से हि प्राप्त होते हैं।


महात्मा बुद्ध को सतभक्ति का ज्ञान नही था। वह मनमाना आचरण करते थे। व्रत , तप , हठयोग करते थे ।
वे मोक्ष प्राप्त करना चाहते थे परंतु उन्होंने शास्त्र अनुसार भक्ति त्याग कर मनमाना आचरण किया । जिससे वह परमात्मा की सतभक्ति से व पूर्ण मोक्ष से वंचित रहे है। जिससे उनका मन परमात्मा की भक्ति से दूर हो गया और वह नास्तिक बन गए।

महात्मा बुद्ध जी के नास्तिकता की वजह से आज भी चीन, जापान व कई देश के लोग भगवान को नही मानते नास्तिक है।
भगवान पर आस्था नही करते । जानवर जैसी परवर्ती के लोग बन गए है जो ना भगवान को मानते हैं ना आस्था रखते हैं ना हि भगवान से डरते हैं। महात्मा बुद्ध जी का जन्म भारत में हुआ परन्तु भारत को नास्तिक नही बना सके आज भी चीन जापान जैसे देश नास्तिकता की ओर बढ़ते हैं ।

महात्मा बुद्ध जी ने शास्त्र विरुद्ध भक्ति की इसलिए उन्हें परमात्मा की प्राप्ति नही हुई । परमात्मा की प्राप्ति व पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति के लिए पूर्ण गुरु से नाम उद्देश्य लेकर मर्यादा में रह कर सतभक्ति करने से होती है।
पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति शास्त्रों के अनुसार भक्ति करने से होती है। जिसका वर्णन हमारे स्तग्रन्थों , वेद, पुराणों में है कि वह पूर्ण परमात्मा साकार है मनुष्य के समान सदृश्य है। वह हर युग में अवतरित होते हैं और अपनी अच्छी आत्माओ को मिलते हैं उन्हें सत्य से परिचित करवाते हैं व सतभक्ति प्रदान कर उनको सतलोक लेकर जाते हैं जिससे जन्म मरण का रोग नष्ट हो जाता है। आज तक हमने यही सुना कि परमात्मा निराकार है परन्तु वह साकार है जो कि हमारे वेद शास्त्र प्रमाण करते हैं। 


वर्तमान में पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज हि एकमात्र गुरु है जो तत्व को जानने वाले है जो हमारे सद्ग्रन्थों के अनुसार भक्ति बताते हैं जो हमे हमारे सद्ग्रन्थों में छुपे गुडरहस्य को खोल कर सब को सत्य से परिचित करवाते हैं जो पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति व पूर्ण मोक्ष के लिए सतभक्ति बताते हैं जिससे जन्म मरण का रोग कट जाता है। 
संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेकर कर सतभक्ति कर के आपना जीवन सफल बनाये व पूर्ण मोक्ष प्राप्त करे।अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए साधना tv पर 7:30 - 8:30 pm तक।
              
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